आज का गौतम बुद्ध का यह प्रेरणा प्रसंग हमें सिखाएगा कि निर्धन व्यक्ति और एक अमीर व्यक्ति में क्या फर्क होता है।

 

कुछ दान देने के लिए क्या पैसों का होना ही जरूरी है?

क्या व्यक्ति धनवान होना ही जरूरी है या फिर बिना धन के भी किसी को दान किया जा सकता है।

 

एक समय की बात है जब गौतम बुद्ध किसी गांव में प्रवचन कर रहे थे उस गांव में धीरे धीरे कई लोग अपनी समस्याएं लेकर गौतम बुद्ध के पास आने लगे।

 

गौतम बुद्ध के पास जो भी कोई आता वह अपनी हर समस्या का समाधान लेकर जा रहा था

 

धीरे-धीरे यह बात पूरे गांव में फैल गई कि गांव में कोई गौतम बुद्ध नाम के महात्मा आए हैं जो कि हर व्यक्ति की हर समस्या का समाधान कर सकते हैं

हर व्यक्ति के जीवन में सुख एवं समृद्धि लेकर आ सकते हैं

 

उस गांव में एक निर्धन व्यक्ति निवास करता था वह निर्धन व्यक्ति हमेशा सोचता रहता था कि गांव के सभी लोग धनाढ्य सुख समृद्ध एवं संपन्नता से अपना जीवन जीते हैं सिर्फ मैं ही गांव का इकलौता ऐसा व्यक्ति हूं जो कि निर्धन हूं।

 

तब वह गौतम बुद्ध के पास अपनी समस्या लेकर जाता है

गौतम बुद्ध के पास जाने के बाद वह व्यक्ति बुद्ध से कहता है कि महाराज मैं गांव का सबसे निर्धन व्यक्ति हूं।

 

 सभी लोग अपना जीवन सुख एवं समृद्धि से व्यतीत करते हैं लेकिन मैं एक ऐसा अभागा व्यक्ति हूं जो कि निर्धनता में जी रहा हूं । आखिरकार मैंने ऐसी कौन सी गलती कर दी की मैं निर्धन हूं।

 

गौतम बुद्ध उस व्यक्ति से कहते हैं कि तुम निर्धन इसलिए हो तुम कि तुमने आज तक किसी को कुछ भी दिया ही नहीं है

 

यदि तुम किसी को कुछ भेंट करोगे तभी तो तुम्हारे पास वह वापस लौटकर आएगा।

क्योंकि यह तो विधाता का विधान है कि जो व्यक्ति जैसा दूसरों के साथ बर्ताव करता है समय भी उसके साथ वैसा ही बर्ताव करता है।

जो व्यक्ति दूसरों के साथ जैसा व्यवहार करता है दूसरे लोग भी उस व्यक्ति के साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं।

 

यह जीवन वास्तव में एक प्रकार की प्रतिध्वनि है। हम जैसा जैसा करते जाएंगे हमारे पास वैसा ही वापस लौटकर आता जाता है।

 

तभी वह व्यक्ति गौतम बुद्ध से कहता है कि महाराज मेरे पास तो किसी को देने के लिए कुछ भी नहीं है। मैं किसी व्यक्ति को क्या दे सकता हूं।

 

गौतम बुद्ध कहते हैं कि तुम्हारे पास एक ऐसा अनमोल रत्न है जो कि हर किसी के पास नहीं हो सकता है। हर व्यक्ति को वह रतन तुम दे सकते हो।

 

और वह है तुम्हारी मुस्कान।

जरूरी नहीं कि तुम हर किसी व्यक्ति को धन दौलत ही दान करो।

 

तुम एक निर्धन, असहाय एवं दुखी व्यक्ति को अपनी मुस्कान के जरिए भी बहुत कुछ दे सकते हो।

 

तुम अपने दिनभर में से कुछ समय निकालकर किसी ऋषि मुनि महात्मा आदि की सेवा कर सकते हो।

 

तुम चिल्लाती धूप में यात्रा करने वाले किसी भी व्यक्ति को पानी पिला सकते हो।

 

तुम अपने भोजन में से कुछ भोजन‌ बचाकर पशु पक्षियों आदि को खिला सकते हो।

 

और भी ना जाने तुम कितने ही प्रकार की सहायता समाज एवं प्रकृति के लिए प्रदान कर सकते हो।

 

और तुम्हारी यही सहायता आज नहीं तो कल लेकिन तुम्हारे पास खुशी, सुख समृद्धि एवं धन संपदा के रूप में लौट कर जरूर आएगी।

 

वह व्यक्ति भाव विभोर होकर गौतम बुद्ध के चरणों में प्रणाम करता है और गौतम बुद्ध से कहता है कि महाराज मुझे माफ करें मैं हमेशा मेरी निर्धनता का रोना रोता रहता था। मैंने कभी भी इन सब चीजों पर विचार ही नहीं किया जो कि ईश्वर ने मुझे पहले से देकर रखी है।

 

आपका बहुत-बहुत शुक्रिया इस दुखी एवं असहाय व्यक्ति को सदमार्ग दिखाने के लिए।

 

वह व्यक्ति गौतम बुद्ध को प्रणाम कर वापस घर लौट जाता है और उसी दिन से वह उन चीजों पर ध्यान करना शुरू कर देता है जो कि उसके पास वर्तमान में मौजूद थी।

 

वह व्यक्ति खुशी से अपना जीवन यापन करने लगता है

 

दोस्तों गौतम बुद्ध के इस प्रेरणा प्रसंग से हमें सीख मिलती है कि हम उन सब चीजों का रोना रोते रहते हैं जो कि हमारे पास ना ही तो पहले से थी और ना ही वर्तमान में है

 

और ना ही हमें पता है कि वो हमारे पास भविष्य में होंगी भी या फिर नहीं।

 

लेकिन फिर भी हम उन भौतिक वस्तुओं व इच्छाओं का विचार करके अपने इस बहुमूल्य वर्तमान को खोते जाते हैं।

 

सबसे बड़ी संपदा, सबसे बड़ा धन व्यक्ति का समय ही होता है क्योंकि व्यक्ति अपना भविष्य चिंतन करते करते अपने वर्तमान समय को खोता रहता है

 

हमें भविष्य की चिंता ना करते हुए भूतकाल से सीख कर अपने वर्तमान को खुशी-खुशी जीना चाहिए

क्या पता कल हो या ना हो

 

सच कहें तो हमने अपनी जिंदगी में कुछ सच्चे मन से चाहा ही नहीं।

जिसको हमने सच्चे मन से चाहा उसको हमने कभी पाया ही नहीं।

और जिन चीजों को हमने पाया उसको इस कदर खो दिया जैसे कि वह हमारी जिंदगी में आया कि नहीं।

 

दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आपको यह गौतम बुद्ध का प्रेरणा प्रसंग पसंद आया होगा

उम्मीद करता हूं कि आपको इस प्रेरणा प्रसंग से कुछ ना कुछ सीखने को जरूर मिला होगा